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दहेज मुक्त भारत

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jagatgururampalji.org चुनौतियाँ मुँह बाए खड़ी हैं, परंतु इनमें से एक चुनौती ऐसी है, जिसका कोई भी तोड़ अभी तक समर्थ होता नहीं दिख रहा है । कहना नहीं होगा कि विवाह संस्कार से जुड़ी हुई यह सामाजिक विकृति दहेज प्रथा ही है । दहेज कुप्रथा भारतीय समाज के लिए एक भयंकर अभिशाप की तरह है । हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का यह एक बड़ा कलंक है । ‘ दहेज ‘ शब्द अरबी भाषा के ‘ जहेज ‘ शब्द से रूपान्तरित होकर उर्दू और हिन्दी में आया है जिसका अर्थ होता है ‘ सौगात ‘ । इस भेंट या सौगात की परम्परा भारत में कब से प्रचलित हुई, यह विकासवाद की खोज के साथ जुड़ा हुआ तथ्य है । प्राचीन आर्य ग्रन्थों के अनुसार, अग्निकुंड के समक्ष शास्त्रज्ञ विद्वान विवाह सम्पन्न कराता था तथा कन्या का हाथ वर के हाथ में देता था । कन्या के माता-पिता अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुरूप कन्या के प्रति अपने स्नेह और वात्सल्य के प्रतीक के रूप में कुछ उपहार भेंट स्वरूप दिया करते थे । इस भेंट में कुछ वस्त्र, गहने तथा अन्न आदि होते थे । इसके लिए ‘ वस्त्रभूषणालंकृताम् ‘ शब्द का प्रयोग सार्थक रूप में प्रचलित था । इन वस्तुओं के अतिरिक्त दैनिक जीव...
चुनौतियाँ मुँह बाए खड़ी हैं, परंतु इनमें से एक चुनौती ऐसी है, जिसका कोई भी तोड़ अभी तक समर्थ होता नहीं दिख रहा है । कहना नहीं होगा कि विवाह संस्कार से जुड़ी हुई यह सामाजिक विकृति दहेज प्रथा ही है । दहेज कुप्रथा भारतीय समाज के लिए एक भयंकर अभिशाप की तरह है । हमारी सभ्यता एवं संस्कृति का यह एक बड़ा कलंक है । ‘ दहेज ‘ शब्द अरबी भाषा के ‘ जहेज ‘ शब्द से रूपान्तरित होकर उर्दू और हिन्दी में आया है जिसका अर्थ होता है ‘ सौगात ‘ । इस भेंट या सौगात की परम्परा भारत में कब से प्रचलित हुई, यह विकासवाद की खोज के साथ जुड़ा हुआ तथ्य है । प्राचीन आर्य ग्रन्थों के अनुसार, अग्निकुंड के समक्ष शास्त्रज्ञ विद्वान विवाह सम्पन्न कराता था तथा कन्या का हाथ वर के हाथ में देता था । कन्या के माता-पिता अपनी सामर्थ्य और शक्ति के अनुरूप कन्या के प्रति अपने स्नेह और वात्सल्य के प्रतीक के रूप में कुछ उपहार भेंट स्वरूप दिया करते थे । इस भेंट में कुछ वस्त्र, गहने तथा अन्न आदि होते थे । इसके लिए ‘ वस्त्रभूषणालंकृताम् ‘ शब्द का प्रयोग सार्थक रूप में प्रचलित था । इन वस्तुओं के अतिरिक्त दैनिक जीवन में काम आने वाली कुछ अन्य आवश...